पीएम मोदी ने ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाकर सबको फिर चौंकाया

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मोदी-शाह की जोड़ी ने एक बार फिर सबको चौंकाया। भाजपा में कई नाम चर्चा में चल रहे थे लेकिन कोटा लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए ओम बिड़ला का नाम लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ संकेत दिया कि अब विभिन्न स्तरों पर अगली पीढ़ी ही अग्रिम मोरचे पर नजर आएगी। 56 वर्षीय बिड़ला का नाम आगे करने को नई सोच व नई पीढ़ी को आगे करने का भी संकेत माना जा रहा है। भाजपा की रणनीतिक टीम के एक सदस्य ने कहा कि मोदी युग में चयन, मनोनयन के लिए एक ही शर्त है उपयोगिता और उत्पादकता।

अहम भूमिकाएं निभाई

ओम बिड़ला ने परदे के पीछे कई अहम भूमिकाएं निभाई हैं। वे पार्टी के क्राइसिस मैनेजरों की टीम में शामिल रहे हैं। पार्टी के लिए अहम चुनावों में परदे के पीछे प्रबंधन का दायित्व उन्हें मिलता रहा है। राष्ट्रपति चुनाव की पूरी प्रक्रिया उनके घर से संचालित की गई। उपराष्ट्रपति चुनाव में भी उनको अहम दायित्व दिया गया था। उन्हें कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में समन्वयक टीम में शामिल किया गया। लोकसभा में वे पार्टी के व्हिप भी रहे।

स्वभाव नरम एक्शन में आक्रामकता

बिड़ला को जानने वालों का कहना है कि उनके स्वभाव में तो नरमी है लेकिन एक्शन में आक्रामकता है। वे जोखिम लेने से परहेज नहीं करते। बड़ी जिम्मेदारी के पीछे उनके इस किरदार की भी अहम भूमिका रही है।

शाह और संघ के करीबी

बिड़ला को जो जिम्मेदारी मिली उसे मुस्तैदी से उन्होंने निभाया। इस हुनर के चलते बिड़ला को अमित शाह का करीबी माना जाता है। भाजपा की युवा शाखा से प्रमुख संगठन में कई भूमिकाओं में रहे बिड़ला को राष्ट्रीय स्वंय संघ का भी प्रिय माना जाता है।

सदन में मर्यादाओं का हमेशा रखा ख्याल

बिड़ला को करीब से जानने वालों का कहना है कि वे संसद में ऐसे चेहरों में शामिल रहे हैं जिन्होंने सदन की मर्यादा कभी नहीं तोड़ी। तीखे आरोप-प्रत्यारोप के दौर में भी उन्होंने विरोधियों पर आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग नहीं किया।

छात्र राजनीति से लोकसभा अध्यक्ष तक का सफर

1973 में कोटा के राजकीय मल्टीपरपज माध्यमिक विद्यालय से छात्रसंघ अध्यक्ष चुनाव जीत कर राजनीतिक यात्रा शुरू की

1983-84 में कोटा सहकारी होलसेल उपभोक्ता भण्डार के अध्यक्ष चुने गए।  यह पद आज भी उनके परिवार के कब्जे में है

2003 में कोटा सीट से पहली बार विधायक बने। तात्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें संसदीय सचिव बनाया था

2014 में पहली बार कोटा संसदीय सीट से लोकसभा के लिए चुने गए

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