‘डिनर पॉलिटिक्स’ से दूर रहे सरकार

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भोपाल।  सरकार की डिनर पॉलिटिक्स से दूर रहे पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अब अपनी ही सरकार को घेरा है। उन्होंने बुरहानपुर में वनवासियों पर गोली चलाने की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है।  दिग्विजय ने कहा जो घटना हुई है वह मौजूदा  शासन की घोषित नीति के विरुद्ध है व निंदनीय है।  इसी मामले में कांग्रेस विधायक हीरा अलावा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर घटना की निंदा की है।

दरअसल, बुराहनपुर में आदिवासियो पर चलाई गई गोली को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपनी ही कांग्रेस सरकार को घेरा है।  उन्होंने ट्वीट कहा कहा है कि कमल नाथ के नेतृत्व में कॉंग्रेस की सरकार की प्राथमिकता आदिवासी विकास और उनके अधिकारों का संरक्षण है। जो घटना हुई है वह मौजूदा  शासन की घोषित नीति के विरुद्ध है अत: निंदनीय है और तत्काल शासन को दोषी अधिकारीयों पर कार्यवाही करना चाहिए। गौरतलब है,कि दो दिन पहले प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट द्वारा विधायकों के लिए आयोजित रात्रि भोज से भी दूरी बनाकर रखी थी। जबकि इस भोज में मुख्यमंत्री कमलनाथ के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरा दित्य सिंधिया,सुरेश पचौरी भी शामिल हुए थे,लेकिन भोज से दिग्विजय व पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने दूरी बना कर रखी।
विधायक अलावा ने भी जताया विरोध
जयस संगठन छोड़ कांग्रेस से विधायक बने हीरालाल अलावा ने भी इस मामले में मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा,कि एक ओर राज्य सरकार वन अधिकार अधिनियम अंतर्गत पट्टे पाने से वंचित रहे आदिवासियों को उनका अधिकार देने की बात कर रही है। दूसरी ओर ऐसे आदिवासियों की जमीन पर लगी फसलें उजाडऩे के साथ उन्हें अतिक्रमण माफिया करार दिया जा रहा है,जबकि संबंधित आदिवासी परिवार वनभूमि पर सालों से अपने निवास के सबूत पेश कर चुके हैं। यह दोहरा बर्ताव हैरत पैदा करने वाला है।
यह है मामला
बुरहानपुर जिले के ग्राम सिवल में गत दिनों राजस्व एवं वन विभाग का अमला वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंचा था। इस दौरान आदिवासियों के एक समूह ने वन अमले पर हमला बोल दिया। बचाव में वन अमले ने भी बंदूक से छर्रे दागे। इससे चार आदिवासी घायल हुए। आदिवासियों का दावा है,कि वे वर्ष 1989-90 से संबंधित भूमि पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं। जबकि राजस्व व वन विभाग के रिकॉर्ड में यह अतिक्रमण है। गत दिनों वन अधिकार अधिनियम के तहत वंचित आवेदकों को पट्टे देने की प्रक्रिया नए सिरे से शुरु होने पर सिवल गांव के आदिवासी भी सक्रिय हो गए। गौरतलब है,कि पिछली सरकार ने वनाधिकार पट्टों के लिए प्राप्त करीब 3.65 लाख दावों को अपात्र पाते हुए खारिज कर दिया था। चुनाव के दौरान कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया और अपने वचन पत्र में इन्हें वंचित बताते हुए पट्टा देने का बात कही थी। सरकार ने इस दिशा में प्रयास भी शुरु कर दिए हैं।

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