EPF से जुड़ा यह महत्वपूर्ण फैसला आपको लेना है

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कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने तीन महीनों के लिए कर्मचारी प्रोविडेंट फंड (EPF) में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के योगदान को 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। इसकी वजह से तीन महीनों तक कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा सैलरी आएगी। इसमें मंत्रालय की तरफ से कर्मचारियों को PF योगदान में अपना 2 प्रतिशत कम नहीं करने का विकल्प रहेगा।

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मंत्रालय ने मई, जून और जुलाई महीनों के लिए कर्मचारियों के समक्ष Voluntary Provident Fund (VPF) का विकल्प रखा है जिसके तहत वे PF में अपना 12 प्रतिशत योगदान जारी रख सकते हैं। कंपनियां इन तीन महीनों तक PF अकाउंट में 10 प्रतिशत योगदान ही करेंगे।

कंपनियां इस संबंध में अपने कर्मचारियों को ई-मेल भेजकर विकल्प चुनने का अवसर प्रदान कर रही है। यदि कर्मचारी ने VPF का विकल्प नहीं चुना तो उसके PF खाते में उसकी तरफ से भी 10 प्रतिशत योगदान ही जाएगा। इस तरह इस स्थिति में नियोक्ता और कर्मचारी दोनों की तरफ से PF अकाउंट में 10-10 प्रतिशत योगदान ही जमा होगा। वैसे यह प्रणाली सिर्फ तीन महीनों के लिए ही लागू रहेगी और इसके बाद वापस दोनों का 12-12 प्रतिशत योगदान जमा होना शुरू हो जाएगा। कर्मचारी के पास यदि पैसों की तंगी नहीं है और वह अपने PF अकाउंट में 12 प्रतिशत राशि ही जमा करना चाहता है तो वह इसे Voluntary Provident Fund (VPF) के तहत चुन सकता है। इसके लिए उसे अलर्ट रहना होगा और यदि कंपनी ने यह ईमेल नहीं भेजा है तो उसे इस बारे में बात करनी होगी।

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