विधायकों को 50 हजार का लैपटॉप देने पर वित्त विभाग ने जताई असहमित

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भोपाल। प्रदेश के सभी विधायकों को 50 हजार कीमत का लैपटॉप बांटने के सरकार के फैसले पर वित्त विभाग ने असहमति जताई है। विभाग का यह अडंगा सूबे के खाली खजाने व अब तक 10,600 करोड़ के कर्ज लेकर जैसे तैसे सरकार चलाने की स्थिति को देखते हुए सामने आया है।

गौरतलब है,कि राज्य शासन ने हाल ही में सभी विधायकों को 50 हजार रुपए मूल्य को लैपटॉप देने का निर्णय लिया है। इनमें वे 120 विधायक भी शामिल हैं जो पिछली सरकार में लैपटॉप ले चुके हैं। संसदीय कार्य विभाग उक्ताशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है और इसे शीघ्र ही कैबिनेट बैठक में रखे जाने के  आसार हैं।

 मंत्री,विधायकोंं की शिक्षा पर उठे सवाल

लैपटॉप वितरण प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य व अन्य विधायकों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी चर्चा शुरु हो गई है। विशेषकर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी के मंगलवार को एक कार्यक्रम में अंग्रेजी ज्ञान को लेकर स्वयं उनके द्वारा ही खुलासा किए जाने को लेकर यह विषय बुधवार को राज्य विधानसभा के गलियारों में भी चर्चा का विषय रहा। ज्ञात हो कि इससे पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी द्वारा गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री का संदेश न पढ़ पाने क ो लेकर  चर्चा में रह चुकी हैं।

प्रदेश में विधायकों की शिक्षा

मध्यप्रदेश में 230 विधानसभा सीटें हैं। मौजूदा समय में 229 विधायक हैं जबकि झाबुआ विधानसभा सीट भाजपा विधायक जीएम डामोर के इस्तीफे के बाद खाली है। सांसद बनने के बाद जीएस डामोर ने विधायक पद से इस्तीफ ा दे दिया था। प्रदेश में 67 फ ीसदी विधायक स्नातक और स्नातकोत्तर तक शिक्षा प्राप्त हैं। 69 विधायक ऐसे हैं जो या तो केवल साक्षर हैं या बारहवीं कक्षा तक ही शिक्षा हॉसिल कर सके। इनमें 3 विधायक डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त, 57  स्नातकोत्तर, 56 स्नातक, 39 स्नातक प्रोफेशनल,5 डिप्लोमाधारी, एक अन्य डिग्री धारी,37 हायर सेकेण्ड्री,13 हाईस्कूल,7-7 माध्यमिक व प्राथमिक तक शिक्षा प्राप्त एवं 5 केवल साक्षर हैं।

 2008 में शुरू हुआ था लैपटॉप देने का सिलसिला

मध्यप्रदेश में विधायकों को लैपटॉप देने का क्रम वर्ष 2008 से शुरू हुआ था। इसका मकसद यही था कि विधायक अपना काम बेहतर ढंग से कर सकें। तब से हर विधानसभा में विधायकों को लैपटॉप का तोहफ ा मिलता है।

ऑनलाइन हुआ काम-काज

विधानसभा सचिवालय ने वर्ष 2013 से ऑनलाइन काम-काज की शुरुआत कर दी थी। शुरुआत में विधानसभा और मंत्रालय के बीच ऑनलाइन वर्किं ग शुरू हुई, अब विधायकों को भी ऑनलाइन सवाल भेजने की सुविधा मिल गई है। इसके लिए विशेष प्रकार से तैयार किया गए सॉफ्टवेयर का उपयोग विधायकों को करना होता है और इसी के माध्यम से विधायक सवाल भेज देते हैं। इससे सचिवालय को भी आसानी होती है। लैपटॉप पर कार्य करने व ऑनलाइन कार्य के लिए विधानसभा सचिवालय द्वारा इन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

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